मनीष गुप्ता हत्याकांड : गिरफ्तार दरोगा-सिपाही ने इंस्पेक्टर को दोषी बताया

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कानपुर के प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता की गोरखपुर में पुलिस की पिटाई से मौत के मामले में मंगलवार को दो और आरोपित दरोगा राहुल दुबे और सिपाही प्रशांत कुमार की गिरफ्तारी के बाद पूरे 6 घंटे रामगढ़ताल थाने पर पुलिस का फिल्मी ड्रामा जारी रहा। करीब दोपहर 2.20 बजे दोनों की गिरफ्तारी के बाद रामगढ़ताल थाने पर पूरे 6 घंटे पुलिसिया ड्रामा चलता रहा। रात 8.30 बजे दोनों आरोपितों से पूरे 6 घंटे की पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद वहां से न्यायिक अभिरक्षा में दोनों को जेल भेजा गया।

गिफ्तारी की सूचना मिलते ही SIT टीम भी रामगढ़ताल थाने पहुंच गई। SIT अधिकारियों ने दोनों से एक साथ और बारी बारी कर सवाल पूछे, लेकिन इस बीच दोनों इस पूरे घटनाक्रम से खुद का पल्ला झाड़ते हुए सारा ठिकरा इंस्पेक्टर जेएन सिंह और सब इंस्पेक्टर अक्षय मिश्रा पर फोड़ते रहे। दोनों खुद को बेगुनाह बताते हुए सिर्फ इंस्पेक्टर के आदेशों के पालन का SIT को हवाला देते रहे।

आरोपितों का कहना था कि इंस्पेक्टर के बुलाने पर वह मनीष को होटल से लेकर मानसी अस्पताल गए थे। उससे पहले क्या हुआ, इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता है। आरोपितों का कहना था कि घटना के बाद उन्हें भी यही बताया गया था कि शराब के नशे में मनीष को थोड़ी चोटें आई हैं। अस्पताल ले जाकर इलाज कराने का आदेश मिला था। हमने सिर्फ आदेश का ही पालन किया।

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दरोगा और सिपाही ने लगाए इंस्पेक्टर पर आरोप : इस बीच SIT के सवालों में दोनों इस कदर उलझ गए कि दरोगा और सिपाही के आंखों से आंसू तक निकल पड़े। 6 घंटे की पूछताछ के दौरान कई पानी की बोतलें भी खत्म हो गई, लेकिन वह किसी भी हाल में खुद को बेगुनाह ही बताते रहे। मानसी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज ले जाने में हुई देरी के सवाल पर आरोपित दोनों पुलिसकर्मियों ने आजाद नगर चौकी के दरोगा पर ठिकरा फोड़ दिया। उनका कहना था कि मानसी से दूसरी टीम लेकर मेडिकल गई। देरी क्यों हुई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि SIT के सवालों का जवाब देते दरोगा और सिपाही ने इंस्पेक्टर पर कई आरोप भी लगाए हैं।

15 दिन बाद ही सही लेकिन पुलिस ने माना हत्या :
27 सितंबर की रात रामगढ़ताल पुलिस द्वारा मनीष गुप्ता को पीट- पीटकर मार डालने के मामले में घटना के पहले दिन से इस हत्या को हादसा साबित करने में लगी रही गोरखपुर पुलिस भी अब इस वारदात को हत्या मानने पर मजबूर हो गई है। अब तो इस मामले में गिरफ्तारी का श्रेय लेने के लिए पुलिस हत्या के आरोपितों को गिरफ्तार किए जाने का प्रेस नोट भी जारी करने लगी है।

हालांकि 10 अक्टूबर को हुई पहली इंस्पेक्टर और दरोगा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अपने प्रेस नोट में इसे खुलकर हत्या बताने से परहेज किया था। उस दिन प्रेस नोट में दो वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार करने की बात कही गई थी, लेकिन मंगलवार को दूसरी दरोगा और सिपाही के गिरफ्तारी के बाद पुलिस खुलकर हत्यारोपितों को गिरफ्तार करने का प्रेस नोट जारी की।

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