मनीष हत्याकांड : गोरखपुर पुलिस कस्टडी में हत्यारोपियों का स्वागत सैल्यूट-समोसे से

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आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा देर रात जेल भेजे गए

कानपुर के रियल एस्टेट कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या के मामले में फरार आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंच गए। गिरफ्तारी के बाद दोनों को उसी रामगढ़ताल थाने में लाया गया, जहां से कभी वे थानेदारी चलाते थे। इस दौरान दोनों का स्वागत पुलिसवालों के सैल्यूट और चाय-समोसे से हुआ। खास बात यह कि SIT और गोरखपुर पुलिस की 13 टीमें इन्हें पकड़ने के लिए सिर्फ दबिश मारती रह गई। बांसगांव पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया।

हत्याकांड के 13 दिन बाद दोनों पकड़े गए हैं। दोनों को देर रात कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आज दोनों की कस्टडी रिमांड के लिए एसआईटी अर्जी दाखिल करेगी। अभी इस हत्याकांड में 4 अन्य आरोपी पुलिस वाले फरार हैं। उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। पुलिस महकमे ने सभी आरोपियों पर एक लाख का इनाम घोषित किया है।

देवरिया बाइपास तिराहे से दबोचे गए दोनों आरोपी
गोरखपुर पुलिस के बांसगांव इंस्पेक्टर राणा देवेंद्र सिंह की टीम ने रविवार की शाम करीब 5 बजे देवरिया बाईपास तिराहे से आरोपित इंस्पेक्टर और दरोगा को गिरफ्तार किया। शाम करीब 5.15 बजे आरोपित इंस्पेक्टर और दरोगा को लेकर बांसगांव पुलिस उसी रामगढ़ताल थाने पहुंची, जहां जेएन सिंह इंस्पेक्टर हुआ करते थे। यहां तैनात पुलिसकर्मी जेएन सिंह को देखते हुए सावधान की मुद्रा में आ गए। सैल्यूट मारते हुए बोले- जय हिंद सर…। जेएन सिंह ने वहां तैनात पुलिस वालों का पुराने ही अंदाज में हालचाल पूछा। हालांकि, अधिकारियों के पहुंचते ही जेएन सिंह के तेवर नरम पड़ गए।

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पूछताछ के लिए आरोपी जेएन सिंह को उसके ही चेंबर में बैठाया गया। थाने पर बकायदा बैरिकेडिंग कर मीडिया और अन्य लोगों को अंदर जाने से रोक दिया गया। कुछ ही देर में सूचना पाते ही कानपुर SIT की टीम भी पहुंच गई। इसके बाद चेंबर का हरा पर्दा तान दिया गया।

इसके बाद SIT ने पूछताछ शुरू की। फिर चाय-नाश्ते का दौर शुरू हुआ। थाने से कुछ ही दूरी पर मौजूद फेमस समोसे की दुकान से इंस्पेक्टर के पसंदीदा समोसे-चटनी और चाय आ गई। शाम 5.30 बजे अपने चेंबर में गए जेएन सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा इस बीच एक बार भी बाहर नहीं आए। करीब 6 घंटे की पूछताछ के बाद अचानक रात 11.20 बजे गिरफ्तारी की स्क्रिप्ट पूरी तरह बदल गई।

इस बीच थाने के सामने भीड़ इकट्‌ठा हो चुकी थी। लोगों के गुस्से को देखते हुए आरोपी इंस्पेक्टर और दरोगा को लोगों की नजरों से बचाते हुए आधी रात कोर्ट में पेश किया गया। इसके लिए पुलिस वैन पहले थाने के अंदर गई। इसके बाद मीडिया के कैमरों को बचाने के लिए कई बार थाने की बिजली काटी गई। बिजली की आंख मिचौली के बीच आरोपित इंस्पेक्टर-दरोगा को पुलिस थाने से लेकर कोर्ट निकल गई।

मेडिकल टीम थाने बुलाकर हुआ चेकअप : कोर्ट में पेश करने से पहले आरोपित पुलिस वालों का मेडिकल कराने पुलिस उन्हें जिला अस्पताल नहीं ले गई, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से मेडिकल टीम थाने ही बुलाकर रात करीब 10.30 बजे उनका मेडिकल कराया गया। इसके बाद रात 11.20 बजे थाने से निकलकर रात 12 बजे भारी सुरक्षा के बीच आरोपितों को एसीजेएम फास्ट ट्रैक कोर्ट अमित कुमार की अदालत में पेश किया गया। यहां SIT ने आरोपितों के ट्रांजिट रिमांड की ऐप्लीकेशन डाल रखी थी, जबकि आरोपितों की ओर से बेल एप्लिकेशन नहीं डाली गई थी। अदालत ने रिमांड एप्लिकेशन खारिज करते हुए दोनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

नेहरू बैरक में एक-दूसरे का सहारा बने रहे इंस्पेक्टर-दरोगा : रात 1.10 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों आरोपित पुलिस वालों को मंडलीय कारागार में दाखिल कराया गया, जहां दोनों को नेहरू बैरक में रखा गया। कहा जा रहा है कि सुरक्षा के लिहाज से नेहरू बैरक में अन्य किसी कैदी को नहीं रखा गया। देर रात हो जाने की वजह से आरोपित पुलिस वालों को जेल में भोजन भी नहीं मिला। जेल प्रशासन ने भी जेल में सुरक्षा के लिहाज से नेहरू बैरक की सुरक्षा बढ़ा दी है, क्योंकि जेल में एक- दो नहीं बल्कि दर्जनों ऐसे बदमाश बंद हैं, जिन्हें आरोपित इंस्पेक्टर और दरोगा ने ही गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

तहरीर में इन 6 पुलिसकर्मियों के नाम : मृतक की पत्नी मीनाक्षी ने पुलिस को दी तहरीर में 6 पुलिसकर्मियों को हत्या का दोषी ठहराते हुए नामजद किया था। इनमें इंस्पेक्टर रामगढ़ताल जेएन सिंह, चौकी इंचार्ज फलमंडी अक्षय मिश्रा, सब इंस्पेक्टर विजय यादव के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जबकि तहरीर में नामजद किए गए सब इंस्पेक्टर राहुल दुबे, हेड कांस्टेबल कमलेश यादव, कांस्टेबल प्रशांत कुमार की जगह 3 अज्ञात पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज हुआ।

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