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सावधान : डेंगू का फोबिया, डॉक्टर कमा रहे रुपईया

मौसम परिवर्तन के साथ ही पूर्वांचल में डेंगू का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। एक्सपर्ट का मानना है कि यदि डेंगू का सही तरीके से इलाज किया जाए तो आसानी से मरीज रिकवर हो सकता है, लेकिन इस स्वास्थ्य विभाग के मिस मैनेजमेंट से डेंगू बिगड़ रहा है। कई अस्पताल बिना जरूरत के ही मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने रहे हैं। इससे प्लेटलेट्स की ब्लैक मार्केटिंग हो रही है। लोगों के डर को भुना कर कई डॉक्टर अनाप-शनाप फीस वसूल रहे हैं। यही नहीं जिन लोगों को जरूरत है, उन्हें प्लेटलेट्स नहीं मिल पा रही है। यहीं नहीं कुछ मरीजों को सही समय से उपचार नहीं मिल पा रहा है।

तीमारदारों और मरीजों में डेंगू का फोबिया है। यहीं कारण है कि हल्का बुखार या सिर में दर्द होने पर लोग अपने को डेंगू मान लेते हैं और अपने आप ही प्लेटलेट्स की जांच कराने पहुंच जाते हैं और जैसे ही पता चलता है कि प्लेटलेट्स काउंट कम हो गया है, वह बिना देरी किए प्लेटलेट्स चढ़वाने पहुंच जाते हैं। कुछ चिकित्सक भी प्लेटलेट्स चढ़वाने की सलाह देते हैं, जो सही नहीं है। यहीं कारण है कि इस वक्त ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स को लेकर क्राइसिस चल रही है।

सेंटर फॉर हेल्थ प्रोटेक्शन से साभार

10 से 12 हजार से कम प्लेटलेट्स खतरनाक :
विशेषज्ञ बताते हैं कि डेंगू से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि साहस रखने की जरूरत है। सही इलाज से जल्द ठीक हो जाता है। उनका कहना है कि डेंगू में केवल उन मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत है, जिनकी प्लेटलेट्स काउंट 10,000 से कम है, या फिर मरीज को ब्लीडिंग हो रही हैं, अन्य मरीजों को बुखार आने के कुछ दिन बाद प्लेटलेट्स अपने आप बढ़ना शुरू हो जाती है।

बुखार और उल्टी से गिरती है प्लेटलेट्स : जब डेंगू बुखार आता है तो प्लेटलेट्स का गिरना तय है। इसे रोकने के लिए कोई दवाई नहीं है, लेकिन जैसे ही बुखार टूटता है तो प्लेटलेट्स दोबारा से बढ़नी शुरू हो जाती है। उन्होंने बताया कि कि लोगों को बार-बार प्लेटलेट्स चेक कराने की जरूरत नहीं है। इस दौरान पानी अच्छी मात्रा में पिएं। इसके साथ ही खाने-पीने का ध्यान रखें।

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20,000 से कम काउंट होने पर न घबराएं :
डॉक्टर का कहना है कि बीस हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर भी नहीं घबराना चाहिए। इसकी आवश्यकता तभी होगी जब बॉडी पर चकत्ते पड़ जाएं या ब्लीडिंग होने लगे। यह लक्षण डेंगू हेमरंजिक फीवर में ही देखने को मिलते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो थोड़ा धैर्य रखें, क्योंकि अगले चार से पांच दिन बॉडी की बोन मैरो खुद प्लेटलेट्स का निर्माण करने लगती है तथा तेजी से इसका काउंट भी बढ़ जाता है।

प्लेटलेट्स चढ़ाने के साइड इफेक्ट :
प्लेटलेट्स का साइड इफेक्ट भी देखने में आता है। एक्सपर्ट बताते है कि होल ब्लड से जब प्लेटलेट्स निकाला जाता है तो तब उसमें प्लाज्मा की भी थोड़ी मात्रा मौजूद रहती है। इस प्लाज्मा में एंटी बॉडी होने की वजह से किसी हाइपर सेंसेटिव व्यक्ति के बॉडी में रिएक्शन देखने को मिल जाते हैं, लेकिन यह सभी के साथ नहीं होता है। इसके लिए बॉडी का हाइपर सेंसेटिव होना जरूरी है।

बुखार आए तो पहले करें ये काम

  • सबसे पहले सिंपल पैरासीटामोल दवा का सेवन करें।
  • इसके बाद डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
  • लक्षण मिलते जुलते हैं तो डेंगू का एलाइजा टेस्ट कराएं।
  • अपने मन से एंटीबायोटिक मत खाए, वरना बॉडी में प्लेटलेट्स की मात्रा कम हो सकती है।
  • शरीर पर चकत्ते या ब्लीडिंग जैसे लक्षण नहीं हैं तो प्लेटलेट चढ़वाने से पहले डॉक्टरों से अच्छी तरह बात करें।

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