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सालिग्राम तुलसी विवाह : इस मंगल गीत के साथ आप भी हों शामिल

सोमवार को सालिग्राम-तुलसी का विवाह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लेकर होगा। इसके लिए विभिन्नी मंदिरों में जोरशोर से तैयारियां चल रही हैं। धर्मगुरु बताते हैं कि जिस प्रकार एक कन्या का विवाह होता है उसी तरह वैदिक परंपरा के तहत सालिग्राम का शिला व तुलसी के पौधे का विवाह सभी रस्मों का पालन करते हुए होगा। सालिग्राम तुलसी विवाह के बारे में जानने से पहले सुने ये विवाह गीत…

आखिर क्यों मनाया जाता है सालिग्राम व तुलसी का विवाह : पौराणिक काल में वृंदा नामक एक कन्या का राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था। वह भगवान विष्णु की परम भक्त थी।उसका विवाह राक्षस जलंधर से हो गया। वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी। एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध में चले गए और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गई।व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को न जीत सके सारे देवता जब हारने लगे तो भगवान विष्णु जी के पास गए। सबने भगवान से प्रार्थना की तो उन्होंने भगवान ने जलंधर का रूप रखा और वृंदा के महल में पहुंच गए जैसे ही वृंदा ने अपने पति को देखा,वे तुरंत पूजा में से उठ गई और उनके चरण छू लिए।

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जैसे ही उनका संकल्प टूटा,युद्ध में देवताओं ने जलंधर को मार दियाl वृंदा सारी बात समझ गई उसने भगवान को श्राप दे दिया कि आप पत्थर के हो जाओ,भगवान तुंरत पत्थर के हो गए। वंदा सती हो गई और उनकी राख से एक पौधा निकला तब विष्णु जी कहा किआज से इनका नाम तुलसी है,और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जाएगा और मैं बिना तुलसी जी के भोग स्वीकार नहीं करुंगा। अयोध्या के मंदिरों में भगवान को भोग में तुलसी की पत्ती का भोग लगता है व उसकी मंजरी चढ़ाई जाती है।

तुलसी विवाह 2021 शुभ मुहूर्त : कार्तिक मास एकादशी तिथि 15 नवंबर को सुबह 06 बजकर 29 मिनट तक है। इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी। ऐसे में तुलसी विवाह 15 नवंबर, दिन सोमवार को किया जाएगा। द्वादशी तिथि 15 नवंबर को सुबह 06 बजकर 39 मिनट से प्रारंभ होगी, जो कि 16 नवंबर को सुबह 08 बजकर 01 मिनट तक रहेगी।